हाँ वादा किया था मैंने
लाकर दे दूंगा चाँद
रख लेना अपने दामन में
मगर अभी वक़्त ठीक नही
आजकल वह चाँद दुखी है
चेहरा जर्द है उसका
कहने लगा कल मुझसे
पहले शाम ढलने का
इंतजार करता था सिद्दत से
मगर अब दिल नहीं करता
रोज छींटे पड़ जाते हैं
खून के, तेरी धरती से
दाग हो गए हैं
चाँद के गालों पर
तारे ला दूंगा कहा होगा
इंकार नहीं मुझे
पर इस वक़्त यह ठीक नही
अभी कुछ खुशियाँ है
बाकी तुम्हारे पास
चाँद तारों को
वहीँ छोड़ दो कुछ दिन
धुंधले ही सही
टंगे हुए तो है आसमान में
कुछ रोशनी होने दो
आजकल रोज कुछ घरों के
चिराग बुझ रहे हैं।
Sunday, August 2, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment