माँ मैं यह नहीं पहनूंगी
पापा क्यूँ मेरी शादी कर दी
जब मैं मतलब भी नहीं समझी
अब जब मैं मतलब समझी चूडियों का
तब माँ क्यूँ तोड़ रही हो इन्हें ?
क्यूँ कहती हो मैं विधवा हूँ
तुम कुछ कहती क्यूँ नहीं ?
जिसका चेहरा भी देखा नहीं ठीक से
तुम कहती हो वह मर गया
मुझे चेहरा याद नहीं
तुम कहती हो उसकी याद में जीना धरम हैं ।
क्यूँ अब किसी की
शादी में नहीं जाने देती
पहले पूजा में सबसे आगे बैठी
अब चाची वहाँ जाने भी नहीं देती
माँ मैं अपनी दुनिया खुद बनाउंगी
मेरे दोस्त जो देखते हैं सपने
वह मैं भी देखूंगी
तुम कुछ कहती क्यूँ नहीं ?
मैं यह उजली साडी नहीं पहनूंगी
माँ मैं विधवा नहीं बनूंगी
कुछ कहो न माँ
औरत हो तुम,पर क्यूँ कुछ कहती नहीं
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1 comment:
Bahut badhiya Abhivyakti Dhanyawaad
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