हर युग में जायेगी क्या बनवास को सीता
उसकी होगी अग्नि परीक्षा और पुरुसोत्तम की होगी पूजा ?
लांछन उस रावन पर जिसने माता कहकर मान दिया
महल में न रख कर देवी को
अशोक वाटिका में स्थान दिया
अनपढ़ उस धोबी को पाप
जिसने कहा मैं 'राजा " राम नहीं
की पत्नी बिना एक दिन भी काम चले
सीता तो उस रोज ही मरी थी
जब दुबारा बनवास हुआ था
धरती में कैसे समाती माता
क्या गर्भ हत्या का भी पाप लिखा था ?
आज भी तो मरती है
गर्भ में ही कितनी सीता
तब भी जिंदा घडे में थी
आज भी रख दी जाती है।
या बचकर सहती है
बनवास और 'अग्नि परीक्षा "
पता नहीं कब वह दिन आये
जब जगज्जननी को राजमाता का मान मिलेगा ?
१९ अप्रिल 2008
Sunday, April 20, 2008
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1 comment:
aapki rachna bemisaal hai,
har kathan me ek raaz hai,
nahi rukti koi baat,
kahnewale har yug me honge,
sita ke liye nam aankhen zinda rahengi,
rawan ke bhi pakshdhar dikhaai denge,
bahut badhiyaa..........
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